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Name: रजनी भार्गव
Location: Plainsboro, New Jersey, United States

किताबों में कुछ किस्से हैं, मेरी उम्र के कुछ गुज़रे हुए हिस्से हैं

Thursday, September 06, 2007

क्लैडिस्कोप

कल रात मुझसे लिपट कर
सोई थी एक गज़ल,
सुबह अशआर टिके थे अम्बर पर,
दर्द टिका था कोरों पर,
खनखनाती और रँग बिरँगी किरचों से
उभर आए हैं नए आयाम.
अनजाने अहसास से एक क्लैडिस्कोप
बना लाई है शाम ।

_____________

5 Comments:

Blogger Beji said...

तारीफ करने के लिये शब्द नहीं हैं।

4:17 AM  
Blogger अनूप भार्गव said...

वाह !
तीसरी पंक्ति में अगर
सुबह अशआर टंगे थे अम्बर पर,
कहें तो ?

6:37 AM  
Blogger अनूप शुक्ला said...

सही है। अच्छी है। जवाब दीजिये पाठक की बात का!

7:10 PM  
Blogger रजनी भार्गव said...

बेजी तारीफ़ के लिए धन्यवाद !
अनूप ! मैं सोच रही थी कि तुम ही ठीक कर दोगे ,आधा काम तो कर ही दिया है
और अनूप (शुक्ला)जी आज सूरज किधर से निकला है ?
इतनी सारी टिप्पणियाँ :-)
धन्यवाद

7:47 PM  
Blogger दिनेश श्रीनेत said...

आपकी कविताएं अच्छी लगीं. मैं जल्द शुरू होने वाले हिन्दी पोर्टल में एडीटर हूं. मैं चाहता हूं आप हमारे साहित्य सेक्शन के लिए भी कुछ भेजें, आप अपनी कविताएं यूनीकोड में मेरे इस मेल आईडी पर भेज सकती हैं.
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धन्यवाद दिनेश

6:03 AM  

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