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Name: रजनी भार्गव
Location: Plainsboro, New Jersey, United States

किताबों में कुछ किस्से हैं, मेरी उम्र के कुछ गुज़रे हुए हिस्से हैं

Tuesday, September 18, 2007

रात की कहानी

सुराही से रिसता पानी
छत की मुँडेर के पास ठहर गया था।
रात ने चाँद को सकोरे में उड़ेल कर
मुझे दिया था।
मैं अँजुरी में चाँद भर रही थी।
अँगुलियों से रिसती चाँदनी
अँजुरी में मावस भर रही थी।
सोच रही थी,
जब दूज का चाँद निकलेगा
तो अँजुरी फ़िर भरूँगी।
तुमसे रात की कहानी फ़िर
सुनूँगी।

11 Comments:

Blogger Divine India said...

क्या कहा जाए कल्पना की ऐसी मीठी उड़ान बहुत दिनों बाद पढ़ने को मिली… बहुत ही आनंद से भरी हुई रचना है…।

7:45 AM  
Blogger Shilpa Bhardwaj said...

Bahut hi sundar imaginations!

7:47 AM  
Blogger Reetesh Gupta said...

रजनी जी,

बहुत सुंदर लगी आपकी उपमा और कल्पना वाली उड़ान....बधाई

10:22 AM  
Blogger Beji said...

आपकी रचनाओं को पढ़कर अक्सर आपकी सुंदरता का अनुमान लगाने का मन करता है।

11:03 AM  
Blogger Manoshi Chatterjee said...

Beji, sundarta ka anumaan? Rajni bhabhi bahut bahut sundar hain...angrezee ka shabed sahi baithta hai, gorgeous!

Rajni bhabhi, bahut sundar panktiyaan hain.

5:36 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

अद्भुत कल्पनाशीलता!! बधाई.

8:17 AM  
Blogger रजनी भार्गव said...

दिव्याभ जी, शिल्पा,रीतेश, बेजी, समीर जी और
मानोषी बहुत बहुत धन्यवाद कविता सरहाने का. बेजी मानोषी की बातों में मत आना.मुझसे जब मिलोगी तब ही जान पाओगी.

5:26 AM  
Blogger मूलत:चित्रकार लेकिन पेशे से पत्रकार। said...

लगता है कविता ही हमें बचा पाएगी
शब्द ही हथेलियों पर गुलाब बन कर खिलेंगे
---कल्पना की उड़ान और शब्दों का चयन अच्छा है। बधाई!

6:52 AM  
Blogger महावीर said...

गहन अनुभूतिमय सौंदर्य की व्यापक कल्पना की अभिव्यंजना इस कविता में देखने योग्य है।
बहुत सुंदर! बधाई स्वीकारें।

12:35 PM  
Blogger Devi Nangrani said...

Rajni
bahut sunder udaan hai soch ki aur sunder shabd bhi hai.
daad ho
Devi

6:46 AM  
Anonymous रिपुदमन said...

वाह !
मन्त्र मुग्ध हो गया।

12:21 PM  

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