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Name: रजनी भार्गव
Location: Plainsboro, New Jersey, United States

किताबों में कुछ किस्से हैं, मेरी उम्र के कुछ गुज़रे हुए हिस्से हैं

Wednesday, August 30, 2006

तुम

जब आँखों से ओझल होता है वो कोना,
तुम उस मोड़ पर नज़र आते हो.
जब बहुत याद आते हो तुम,
सन्नाटे के शोर में गूँजते नज़र आते हो.
जब चाँद का प्रतिबिम्ब होता है कुछ धुँधला,
तुम ख्वाब बन पानी पर उड़ते नज़र आते हो.
जब आँगन में सजाते हैं आहटों को,
तुम सामने से आते दिखाई देते हो,
सिरफ़िरी धूप का कोना पकड़
मेरे माथे पर बिखर जाते हो.

3 Comments:

Blogger Udan Tashtari said...

"जब बहुत याद आते हो तुम,
तुम सन्नाटे के शोर में गूँजते नज़र आते हो."
सुंदर पंक्तियों के लिये बधाई.

-समीर लाल

9:12 AM  
Blogger रजनी भार्गव said...

समीर जी,
प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद,
रजनी

11:44 AM  
Blogger मोहिन्दर कुमार said...

बहुत सुन्दर रचना है बाकी अभी बहुत कुछ पढने एंव समझने को बाकी है
मेरे ब्लाग http://dilkadarpan.blogspot.com पर पधार कर अपनी टिप्पणी से मेरी रचनाओं का मुल्याकंन करने की कृपा करें
विशेष रूप से मेरी एक कविता "केवल संज्ञान है" जो http://merekavimitra.blogspot.com पर प्रेषित है आप की टिप्पणी की प्रतीक्षा में है

मोहिन्दर

9:52 AM  

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