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Name: रजनी भार्गव
Location: Plainsboro, New Jersey, United States

किताबों में कुछ किस्से हैं, मेरी उम्र के कुछ गुज़रे हुए हिस्से हैं

Friday, May 16, 2008

मेरे अपने सपने

मेरे सपने मेरे अपने हैं,
कोई भी इस हाशिए पर लिखे
ये फ़िर भी मेरे अपने हैं.
मौजों पर सवार ये तख्ती,
बहुत थपेड़े सहती है.
क्षितिज तक पहुँचने की चाह में
खुद ही मीलों तक बहती है.

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7 Comments:

Blogger Dr.Parveen Chopra said...

बेशक, ये सपने आप ही के ही हैं। बहुत उम्दा लिखा है...वाह..वाह !!

6:39 PM  
Blogger राजीव रंजन प्रसाद said...

सादगी से भरपूर बेहद बेहतरीन रचना है..

***राजीव रंजन प्रसाद
www.rajeevnhpc.blogspot.com

6:55 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

बहुत गजब!! क्या बात है! उम्दा!!!

8:06 PM  
Blogger mahashakti said...

अच्‍छी रचना का प्रस्‍तुत किया है, बधाई

8:10 PM  
Blogger DR.ANURAG ARYA said...

मौजों पर सवार ये तख्ती,
बहुत थपेड़े सहती है.
बहुत सुंदर .....मैंने जो आपका adrees अपने ब्लॉग पर डाला है लगता है ग़लत है....नई पोस्ट नही दिखा रहा है ...ओर मुझे लगा आप लिख नही रही है ....इन दिनों..

7:39 AM  
Blogger Lavanyam - Antarman said...

उम्मीदोँ की कश्ती,
यूँ ही,
सपनो के पाल से फैली,
हवाओँ के दम पे,
बढती रहे,
रजनी भाभी जी :)
- लावण्या

9:27 AM  
Blogger Pratyaksha said...

सुंदर !

10:38 PM  

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